यूपी: बिजली दरों में वृद्धि के ख़िलाफ़ ‘AAP कार्यकर्ता’ 5 सितंबर को करेंगें जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन

  • by Staff@ TSD Network
  • September 4, 2019
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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार बिजली की दरों में इजाफा कर दिया है। यह इजाफ़ा शहरी और कॉमर्शियल क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिजली बिलों को भी प्रभावित करेगा।

इस आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में जहां लगभग 12 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र में करीब 10 फीसदी का इजाफ़ा किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिए हैं।

हम आपको बता दें कि दो साल बाद फ़िर से बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी की गई है। इससे पहले 2017 में योगी सरकार बनने के बाद निकाय चुनाव समाप्त होते ही बिजली की दरों में औसतन 12.73 फीसदी की वृद्धि की गई थी।

इस बीच उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले की चौतरफ़ा निंदा शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में आम आदमी पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष, सभाजीत सिंह ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कल यानि 5 सितंबर को प्रदेश भर में इसके खिलाफ़ विरोध दर्ज करवाने की बात कही। 

उन्होंने ट्विटर पर इसका ऐलान करते हुए लिखा,

“यूपी सरकार द्वारा बिजली की दरों में की गई वृद्धि आम आदमी की जेब पर डाका है इसके खिलाफ आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता 5 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर बिजली बिल की प्रतियां जलायेगे और राज्यपाल महोदया को संबोधित मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंप कर बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की मांग करेंगे।”

 

इस बीच मायावती ने ट्वीट कर कहा,
“उत्तर प्रदेश बीजेपी सरकार द्वारा बिजली की दरों को बढ़ाने को मंजूरी देना पूरी तरह से जनविरोधी फैसला है इससे प्रदेश की करोड़ों खासकर मेहनतकश जनता पर महंगाई का और ज्यादा बोझ बढ़ेगा व उनका जीवन और भी अधिक त्रस्त व कष्टदायी होगा सरकार इसपर तुरन्त पुनर्विचार करे तो यह बेहतर होगा
इस चौतरफ़ा हमले के बाद उत्तर प्रदेश के उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि प्रदेश को सपा बसपा के पापों का परिणाम भुगतना पड़ रहा है।सपा-बसपा सरकार की कारगुजारियों से बिजली कंपनियां भारी घाटे में पहुंच गई हैं। इन्हें घाटे से उबारना बड़ी चुनौती है। सरकार को न चाहते हुए भी बिजली दरें बढ़ानी पड़ रही है।
हालाँकि सरकार भले कितने भी तर्क दे ले लेकिन आम आदमी इस फ़ैसले से जाहिर तौर पर नाख़ुश नज़र आ रहा है। और उनके अनुसार इसका सीधा प्रभाव उनकी जेबों में पड़ेगा।
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