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इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए Corporate Tax में की गई कटौती

  • by Team TSD
  • September 23, 2019

हम इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़ी हर खबर को आप तक पहुँचाते रहते हैं, क्यूंकि हमारा मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक अब तक की कुछ सबसे सफ़ल तकनीकों में से एक होने वाली है। और साथ ही यह दुनिया के भविष्य को भी प्रदूषण से बचाने में बड़ी मददगार साबित होगी।

भारत भी इस चीज़ को भलीभांति समझता है और इसलिए शायद लगातार अपने प्रयासों से घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए भारत में अवसर बनाने की कोशिशें कर रही है। और इसी श्रृंखला में अब अब वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट कर दरों को 15% तक घटा दिया है।

इसको भी सरकार द्वार इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को घरेलू विनिर्माण योजनाओं की ओर प्रेरित करने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

इस पर ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के महानिदेशक विन्नी मेहता ने कथित तौर पर मिंट को बताया,

“रुपये गिरने के साथ, आयात महंगा हो गया है। तार्किक रूप से, विनिर्माण कंपनियां नई इकाइयों के लिए नई घोषित कर व्यवस्था के तहत भारत में घटकों के बढ़ते स्थानीयकरण के अवसर तलाशेंगी। यह सम्पूर्ण विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देगा।”

इसके अलावा, कर दरों में कमी ईवी चार्जिंग स्टेशन संबंधी बुनियादी ढांचे के उत्पादन में निवेश को भी प्रोत्साहित कर सकती है।

Deloitte Touche Tohmatsu India LLP के पार्टनर राजीव सिंह ने कहा,

“भारत में मैन्युफैक्चरिंग का मूल्यांकन करने वाले कुछ ग्लोबल प्लेयर्स हैं और इस फैसले से बिजनेस को मजबूत करने में मदद मिलेगी।”

इलेक्ट्रिक वाहनों और उसके भागों का घरेलू विनिर्माण वर्तमान सरकार के नीतिगत निर्णयों में प्रमुखता से शुमार है। केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन केंद्रित योजना, फेम II के दूसरे चरण के तहत, 50% स्थानीय वाहनों का उत्पादन करने वाली कंपनियां ही केवल इस योजना प्रोत्साहन का लाभ उठा सकती हैं।

इस बीच इस FAME II स्थानीयकरण प्रयास को इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव डालने के लिए भी दोषी ठहराया जाता रहा है, क्योंकि ईवी की बिक्री में कमी के कारण बहुत कम कंपनियां योजना के पुनरावर्तन मानदंडों को पूरा कर रही हैं।

इस योजना में 10 लाख दोपहिया, 5 लाख तीन-पहिया, 55K चार-पहिया और 7K बसों का समर्थन करने के लिए तीन साल में 10,000 करोड़ तक के निवेश का प्रस्ताव था, जो लिथियम आयन बैटरी या अन्य इलेक्ट्रिक पावर पर कार्यरत हों।

इस नई योजना में विनिर्माण संयंत्रों को निवेश से जुड़ी आयकर छूट प्रदान करने के लिए कहा गया है। साथ ही ईवी निर्माण में उपयोग किए जाने वाले कुछ हिस्सों को सीमा शुल्क से भी छूट दी जाएगी।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री ने कहा था कि मार्च 2019 तक, भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग ने भारत में 7.59 लाख इकाइयों की बिक्री दर्ज की गई है जिसमें 1.2 लाख दोपहिया, 6.3 लाख तीन-पहिया और 3.6K यात्री वाहनों की बिक्री शामिल है।

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