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क्या वाकई दिल्ली के पास है ‘पूर्ण राज्य’ हासिल करने का मौका? या है महज़ संभवनाओं में पिरोया सपना?

  • by Team TSD
  • May 9, 2019

देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली हमेशा से ही लोकसभा चुनावों के दौरान सुर्खियाँ पैदा करने वाला राज्य साबित होता है। और इस बात के लोकसभा चुनाव तो दिल्ली के लिए और भी खास हैं।

दरसल इस बार लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सात सीटों पर पूर्व चुनावों की तरह महज़ कांग्रेस और भाजपा के बीच ही टक्कर सीमित नहीं रह गई है। बल्कि कहें तो इस बार के लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी कांग्रेस और भाजपा की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली नज़र आ रही है।

चुनावी पंडितों के अनुसार बीते सालों में राज्य सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी से जुडें क्षेत्रों में किये गये कार्यों के चलते दिल्ली की जनता के बीच कहीं न कहीं आप (AAP) अपनी विश्वसनीयता स्थापित कर रही है। और इसी का सीधा असर इन लोकसभा चुनावों में भी पड़ रहा है, जिसके चलते दिल्ली की लोकसभा सीटों पर आप (AAP) के उम्मीदवारों का पड़ला भारी नज़र आ रहा है।

लेकिन इन चुनावों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली इत्यादि क्षेत्रों में किये गये अपने काम का हवाला देने के साथ ही साथी आम आदमी पार्टी जिस एक मुद्दे को जोर शोर और प्रमुखता से पेश कर रही है, वह है दिल्ली को ‘पूर्ण राज्य’ का दर्जा दिलाना।

जी हाँ! अपने चुनावी मेनिफेस्टो से लेकर भाषणों तक आम आदमी पार्टी सब जगह दिल्लीवासियों से जीतने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात कह रही है। वैसे यह मुद्दा कोई आज का नहीं है। भिन्न भिन्न पार्टियों द्वारा दिल्ली को हमेशा से ही पूर्ण राज्य के सपने दिखाए जाते रहें हैं। दरसल इस बात में कोई शक नहीं है कि एक राज्य के नजरिये से दिल्ली को पूर्ण राज्य बनने पर अनेकों फ़ायदे होंगें। एक ओर लाखों करोड़ रूपये टैक्स देने के बाद भी दिल्ली को केंद्र सरकार द्वारा राज्य कोष के लिए महज़ करीब 325 करोड़ रूपये से संतोष नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही दिल्ली की चुनी हुई सरकारें प्रशासनिक स्तर से लेकर शिक्षा क्षेत्र तक बड़े फैसलें लेने में सक्षम बन सकेगी।

इन तमाम फायदों के बावजूद कई लोगों का हमेशा से तर्क रहा है कि देश की राजधानी और कई विदेशी एम्बेसियों और प्रधानमंत्री और केंद्र के मंत्रियों का गढ़ होने के कारण दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना उचित नहीं है। लेकीन आम आदमी पार्टी इस तर्क को काटने के लिए भी अमेरिका और विश्व के कई अन्य देशों को बतौर उदाहरण पेश करती है।

महज़ 7 सीटें जीत कर आखिर कैसे संविधान बदलने का दावा कर रही है आप?

लेकिन यह तो बात हो गई पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर फैसले के पक्ष और विपक्ष में मोटी मोटी दलीलों की। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी भला कैसे लोगों से जीतने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का दावा कर रही है?

दरसल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संसद में देश का संविधान बदलने की आवश्यकता होगी। और यह तो स्पष्ट है कि आज भी आम आदमी पार्टी अपने दम पर केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में साफ़ तौर पर नहीं है और न ही ऐसी कोई संभवना है। तो भला कैसे आप (AAP) महज़ दिल्ली की सीटों पर विजयी होकर देश का संविधान बदल सकेगी?

दरसल आम आदमी पार्टी का पूर्ण राज्य का वादा महज़ 2 संभावनाओं पर टिका हुआ है। पहली संभावना तो यह कि दिल्ली में सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीत हासिल करें। और दूसरी संभावना यह कि केंद्र में एक मिली-जुली सरकार बने, जिसमें आम आदमी पार्टी भी एक मुख्य रोल अदा करती नज़र आये।

दरसल इन्हीं संभावनाओं के सच होने के बाद ही आप (AAP) उस मिली-जुली सरकार में पूर्ण राज्य की शर्त के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का वादा कर रही है।

लेकिन इन संभावनाओं की डगर आम आदमी पार्टी के लिए आसान नज़र नहीं आती है। ऐसा इसलिए क्यूंकि इन संभावनों में भी कुछ शर्तें निहित हैं, जिनके वास्तविकता का रूप लेने के अवसर काफ़ी कठिन से लगतें हैं।

जैसे पहली तो यह कि दिल्ली में सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीतें। भले ही आम आदमी पार्टी दिल्ली में कड़ी टक्कर दे रही हो, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस और भाजपा दिल्ली की सीटों पर चुनावों के पुराने और मंझे ख़िलाड़ी हैं। और बिना अपवाद शायद ही यह संभव हो कि कांग्रेस या भाजपा में से दिल्ली में कोई एक सीट भी न निकाल पाए।

और दूसरा यह कि आम आदमी पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने का दावा तभी कर रही है, जब वह सरकार भाजपा को सत्ता से बाहर करने के मकसद से बनायीं जाए। अर्थात किसी भी हालत में आप (AAP) सरकार में भागीदार बनने के लिए बीजेपी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने की गुंजाईश को सिरे से खारिच कर रही है। और ऐसे में केंद्र सरकार में आप (AAP) की भागीदारी की संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं।

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अनेकों संभावनाओं में उलझा आम आदमी पार्टी का दिल्ली वालों से पूर्ण राज्य का वादा क्या वाकई वास्तविकता का रूप ले पायेगा या नहीं? लेकिन यह जरुर है कि अगर ऐसा होता है, तो यह एक ऐतिहासिक चुनाव जरुर बन जाएगा, न सिर्फ़ आम आदमी पार्टी के लिए, बल्कि देश और देश की राजधानी के लिए भी।

 

 

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