किसी की हत्या के बाद ही क्यूँ समझ आती है ‘छेड़छाड़’ जैसी घटनाओं की गंभीरता?

  • by Staff@ TSD Network
  • May 16, 2019

हाल ही में दिल्ली के मोती नगर इलाके में हुआ ध्रुव त्यागी हत्याकांड काफ़ी सुर्खियों में है। दिल्ली समेत कई पुरे देश में इसको लेकर आक्रोश और विरोध दर्ज करवाया जा रहा है, जो बिल्कुल जायज है।

इस घटना के बारे में कुछ टिप्पणी करने से पहले हम आपको घटना के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी दे दें। दरसल मोती नगर के बसई दारापुर इलाके में रविवार को 51 वर्षीय ध्रुव त्यागी की अपनी बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर कुछ लोगों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस घटना के दौरान अपने पिता को बचाने आया 19 साल के ध्रुव त्यागी के बेटे अनमोल को भी आरोपियों ने बुरी तरह घायल कर दिया। अनमोल आज भी अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक ध्रुव त्यागी अपनी बेटी के साथ अस्पताल से वापस लौट रहे थे, जिस दौरान उसी इलाके में रहने वाले जहांगीर के एक बेटे ने उनकी बेटी की ओर भद्दे इशारे किये। जिसके बाद जब ध्रुव त्यागी अपने बेटे अनमोल के साथ इस मामले की शिकायत करने जहांगीर के घर पहुंचे, तब वहां जहांगीर के तीन बेटों के साथ उनकी बहस हो गई और आरोप के मुताबिक जहांगीर, उनकी पत्नी और बेटी ने घर की बालकनी से उनपर पत्थर बरसा दिए और साथ ही ध्रुव पर चाक़ू से वार कर उनकी हत्या भी कर दी गई।

अब तक इस मामले में पुलिस ने आरोपी जहांगीर के साथ उसके तीन बेटे और और उसकी पत्नी तथा बेटी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले को हालाँकि अब धार्मिक रंग देने की भी शुरुआत कर दी गई है। लेकिन यह एक अलग बहस है जिसमें आप घटना को धर्म से जोड़ने वालों के तथ्य भी पूरी तरह से नकार नहीं सकतें हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक देश के हर एक कोने में ऐसी निंदनीय घटनाएं होती रहेंगी। और क्या हम ऐसे मामलों को तभी गंभीरता से लेंगें जब तक हत्या जैसी अप्रिय घटनाएं इससे न जुडें?

दरसल ऐसी घटनाएं पहले ही कई बार सामने आ चुकी हैं, यहाँ तक की आज से कुछ साल पहले पंजाब में ऐसे ही अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर एकल पुलिस वाले की ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

दरसल यह तो सभी समझते हैं कि समाज में छेड़छाड़ जैसा घिनौना कृत कभी बर्दाशत नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन कभी आपने देखा है कि कैसे पुलिस या समाज के लोग रोज़ न जाने हजारों की संख्या में हो रहे ऐसे मामलों को सहजता से नज़रंदाज़ कर जाते हैं?

यकीन मानिए अगर इन्हीं छोटी छोटी घटनाओं पर ही अगर पुलिस और समाज द्वारा कठोर कार्यवाई की जाने लगे, तो ऐसे मनचलों और अपराधियों की हिम्मत ही नहीं होगी कि वह समाज में बेटियों और महिलाओं को अपनी गन्दी नज़र उठा कर भी देख सकें। महज़ एक बहुत बड़ी घटना का रूप लेने के बाद ही हाथों में कैंडल लेकर सड़कों पर निकाल जाने से ऐसी वारदातें नहीं रुकने वालीं। जरूरत है इसी गंभीरता और भावना के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की और मनचलों या कहें तो सामाजिक दरिंदों को जेल और कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की।

और जरा जहाँगीर और उसकी पत्नी जैसे माँ-बाप को भी अपने आप में झाँकने की जरूरत है। लेकिन महज़ खुद में झाँकने या निंदा करने से कुछ नहीं होगा। जरूरत है ऐसे अपराधियों को कानून द्वारा कड़ी सजा दिलवाने और साथ ही साथ समाज द्वारा ऐसे अपराधियों का बहिष्कार करने की।

और इसके लिए यह जरूरी नहीं कि छेड़छाड़ जैसी घिनौनी घटना में हत्या इत्यादि जैसी वारदातों का इंतजार किया जाए। दरसल छेड़छाड़ खुद में एक बड़ी वारदात है, जिसमें पुलिस और कानून को आरोपित के खिलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्यवाई करनी चाहिए और साथ ही साथ समाज को ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए।

इस बीच हम आपको ध्रुव त्यागी जी के ही एक रिश्तेदार द्वारा सोशल मीडिया में साझा किये एक पोस्ट के साथ छोड़ते हैं, आप भी पढ़िए पीड़ित परिवार की दशा जिसकों छेड़छाड़ के प्रति हमारे कानून और समाज की लचरता के चलते सामाजिक दरिंदों का शिकार होना पड़ा,

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