क्या एक उम्र के बाद छीन जाना चाहिए ‘ड्राइविंग लाइसेंस’?

  • by Aafreen Nawazish
  • December 18, 2019

उम्र के आधार पर इंसान की शारीरिक व मानसिक क्षमता को हमेशा से पहचाना जाता रहा है। हमारे देश के संविधान में कई ऐसे कानून हैं जो उम्र के साथ चलते हैं जैसे कि ‘मतदान का अधिकार’, ‘विवाह’, ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ इत्यादि।

कई मामलों में देश के कानूनों में हम न्यूनतम उम्र को 18 वर्ष की सीमा से शुरू होते देखते हैं और कथित तौर पर यह उम्र इस सोच के साथ चुनी जाती हैकि इस उम्र पर एक इंसान समझदार या फैसला लेने में सक्षम बन चुका होता है।

लेकिन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कई कानूनों जैसे ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि में हमनें 18 साल की ‘न्यूनतम आयु सीमा’ तय करके अपनी एक ज़िम्मेदारी को तो पूरा कर लिया, लेकिन एक सवाल जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया वह यह कि आखिर शारीरिक क्षमताओं के पैमाने से सीधे जुड़े इस कानून में क्यों कोई ‘अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है?


ध्यान देने वाली बात यह है कि कानून में अधिकांश रूप से 60 वर्ष की आयु को रिटायरमेंट की उम्र माना गया है। ऐसा इसलिए क्यूंकि ऐसा माना जाता है, एक इंसान का दिमाग इस उम्र तक जिम्मेदारी व तनाव नहीं झेल सकता।

जरा गौर कीजिए, अगर हम यह मानतें हैं कि 60 वर्ष की उम्र तक आते-आते कोई व्यक्ति मानसिक रूप से जिम्मेदारी नहीं संभाल सकता, तो भला हम यह कैसे मान ले कि एक 60 वर्षीय बुजुर्ग आदमी एक ट्रक, कार या स्कूटर चलाने की क्षमता भी रखता है?

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चाहे वह ट्रैफिक की बात हो या रात के वक्त ड्राइविंग करने की बात या फ़िर स्पीड लिमिट पर ध्यान देने की बात हो, ऐसी अवस्था को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार से इसको सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। दरसल यह उम्र का ऐसा पड़ाव होता है जब एक इंसान का शरीर व स्वास्थ्य हाइपर सिचुएशन में उसका 100% साथ नहीं दे सकता।


लेकिन इसका मलतब यह नहीं कि गलती उस उम्र के लोगों की है। दरसल यह जिम्मेदारी उनकी ही नहीं, बल्कि उनके जानने वालों की भी है क्योंकि एक लापरवाही खुद उनके व सड़क पर मौजूद अन्य इंसानों के लिए खतरा बन सकती है।

और किसी भी प्रकार से इस ‘Age Factor’ को नजरंदाज़ नहीं किया जा सकता और न ही करना भी चाहिए, फ़िर चाहे बात ‘न्यूनतम आयु सीमा की हो या अधिकतम आयु सीमा की।

और दुःख की बात यह है कि हाल ही में ही मोटर वाहन (संशोधित) अधिनियम 2019 मैं भी “अधिकतम आयु सीमा” के मुद्दे को लेकर कोई भी जिक्र होता दिखाई नहीं दिया।


लेकिन बढ़ती जनसंख्या के चलते सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से बढ़ती दुर्घटनाओं की वजह से अब वह समय आ गया है कि जवाबदेह और ज़िम्मेदार संस्थाएं इस पहलु पर भी ध्यान दें और ‘न्यूनतम आयु सीमा’ के साथ ही साथ ड्राइविंग के सन्दर्भ में ‘अधितकम आयु सीमा’ भी तय की जानी जाए।

 


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Aafreen Nawazish

Guest Writer & A Contributor on TSD