गाँधी होने में “एक उम्र” लगती है, गोडसे तो “एक पल” में हुआ जा सकता है

  • by Staff@ TSD Network
  • May 18, 2019

आज के समय में गाँधी और गोडसे की बहस अक्सर चुनावों के बीच ही सुनाई देती है। हो भी क्यों न, अब भला वो चाय की गुमटियों और कॉफ़ी हाउस जैसी जगहों में होने वाली वैचारिक और राजनीतिक बहसों की विरासत बची ही कितनी है?

खैर! देश में लोकसभा चुनावों का मौसम है, और जैसा की हमनें कहा चुनाव के वक़्त गाँधी और गोडसे का मुद्दा आज भी दाल में छौंक की तरह ही देखा जाता है। लेकिन कहते हैं न की छौंक भी हमेशा रमे हाथों से ही लगवाना चाहिए, वरना स्वाद ख़राब हो सकता है।

और बीजेपी के लिए ऐसा ही चुनावी स्वाद ख़राब करती नज़र आई भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा। हाल ही में उन्होंने गोडसे को सच्चा देशभक्त घोषित कर दिया। हालाँकि बाद में उन्होंने इसके लिए माफ़ी भी माँगी। लेकिन साध्वी प्रज्ञा हाल ही में खुद से ही लड़ती नज़र आ रही हैं। वह सुबह कुछ भी बयान दे देती हैं। और शाम होते होते उसी का खंडन करती नज़र आती हैं। लेकिन मुश्किलें बढ़ती हैं, बीजेपी की।

जी हाँ! दरसल साध्वी प्रज्ञा के इस बयान ने मानों कई बीजेपी नेताओं की सिली जुबान फ़िर से खोल दी। क्यूंकि बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और सांसद ने तो महात्मा गाँधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता घोषित कर दिया। हालाँकि इसके बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित भी कर दिया गया। लेकिन मामला यही नहीं रुका, एक और बीजेपी नेता ने देश को नसीहत दे डाली कि गोडसे को लेकर हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है।

हालाँकि एक ज़िम्मेदार प्लेटफ़ॉर्म होने के नाते हम महज़ अच्छी अच्छी बातों को आपके समक्ष न रखते हुए, देश का सच ही आपको बताना चाहेंगें। दरसल आज भी देश में इस सन्दर्भ में दो तरह की विचारधारा जिन्दा है। लेकिन इसके बावजूद कभी भी गोडसे को सही मानने वाली विचारधारा खुद को इतनी प्रमुखता से पेश करती नज़र नहीं आती है। हालाँकि आज की दौड़-भाग भरी ज़िन्दगी में आम आदमी के पास इन विचारधारों की जंग के लिए वक़्त कहाँ है? लेकिन जो भी संगठन गोडसे समर्थित विचारधारा से इत्तेफ़ाक रखते हैं,  खुद संशय और दबी जुबान में ही इसका समर्थन करते नज़र आते हैं।

और यही कारण है कि सीधे तौर पर साध्वी प्रज्ञा का दिया यह बयान सनसनीखेज बन गया। दरसल जब आप एक राजनैतिक या सामाजिक ओहदे पर हों तब आपको अपने विचारों को सोच समझ कर रखना पड़ता है। और यदि आप सुबह दिए अपने ही बयान को शाम होते होते खुद ही खारिच करने लग जाते हैं, तो आप पर सवाल उठाना जायज है कि आप भला किसी विचारधारा को समझते और जानते भी हैं या महज़ जनता को आकर्षित करने के लिए किसी भी बयान का सहारा लेने लगें हैं?

हालाँकि इस बीच जब गाँधी गोडसे का जिक्र हुआ तो कुछ जानकारों ने भी अपने अंदाज़ में साध्वी प्रज्ञा जो जवाब दिया। और अधिकतर समय की तरह डॉ. कुमार विश्वास एक बार भी अपने शब्दों से यह बाजी मार गये। उन्होंने बिना सीधे साध्वी प्रज्ञा का नाम लिया अपने शब्दों से प्रखर वार करते हुए कहा,

“1000 साल की ग़ुलामी के बाद बलिदानों से मिली आज़ादी अगर हत्याओं व हत्यारों के महिमामंडन करने,उन्हें न्यायसंगत बनाने में बीत रही है,अगर घृणा में लिपटे हम,मर-कट रहे हैं तो भविष्य स्वाघीनता को अयोग्य हाथों में समझकर वापस भी ले सकता है ! दल-नेता-विचार के बंधकों के अलावा हर भारतीय सोचे।” 

इसके साथ ही उन्होंने चौ. मदनमोहन समर की पंक्तियों के जरिये महज़ एक वाक्य में स्पष्टतः कहा,
“गांधी होने में “एक उम्र” लगती है, गौडसे तो “एक पल” में हुआ जा सकता है।”

देखा जाए तो सच्चाई भी यही है, हम गाँधी गोडसे दोनों की विचारधाराओं से अवगत हैं, लेकिन इन दोनों को मुख्यतः याद इनके द्वारा किये गये कामों के लिए ही किया जाता रहा है। और जब बात कामों की आती है, तो चौ. मदनमोहन समर जी की इस पंक्ति का मलतब अपने आप समझा जा सकता है।
Facebook Comments
Staff@ TSD Network

Our hard-working staff writing team | You can reach us at 'contact@tsdnetwork.com'
  • facebook
  • twitter
  • linkedIn
  • instagram

Leave a Reply