कब और कैसे हुआ ‘ब्लॉकचेन’ टेक्नोलॉजी से हमारा परिचय? आप भी जानिये!

  • by Staff@ TSD Network
  • June 6, 2019
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अगर आप तकनीकी दुनिया से थोडा भी वास्ता रखते हैं तो आपने कभी न कभी ‘ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी’ का ज़िक्र सुना ही होगा। कुछ आकंड़ों के मुताबिक भारत में महज़ 12% – 18% लोगों को ही साफ़ तौर पर यह पता है कि असल में ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

ऐसे में जरा सोचिए कि ब्लॉकचेन की शुरुआत कैसे हुई? किसने की? भला इसके बारे में कितने लोगों को पता होगा? क्या आपको पता है, कब दुनिया ने जाना कि क्या है ब्लॉकचेन?

इस लेख के मकसद से हमारा मक़सद आपके साथ यही जानकारी साझा करने का है और यकीन मानिए इसको लिखते वक़्त हमें खुद ब्लॉकचेन को लेकर काफ़ी नई बातें पता लगी। तो सोचा क्यों न आपसे भी यह साझा किया जाए।

दरसल सातोशी नाकामोटो (Satoshi Nakamoto) नामक एक व्यक्ति से ने 2008 में पहली बार “बिटकॉइन: ए पीयर टू पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम” नामक व्हाइटपेपर जारी किया। मुख्य रूप से इसमें “पीयर-टू-पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश संस्करण” का वर्णन किया था, जिसे बिटकॉइन के रूप में जाना गया। और यही से ब्लॉकचेन तकनीक ने अपनी सार्वजनिक शुरुआत की।

दिलचस्प यह है कि सातोशी नाकामोटो (Satoshi Nakamoto) की असल पहचान आज तक पता नहीं लग सकी है। बहरहाल ब्लॉकचैन ही बिटकॉइन अर्थात्को क्रिप्टोकरेंसी को संचालित में उपयोग की जाने वाली मुख्य तकनीक है। और इओस बात में कोई शक नहीं कि यह आगामी समय में ग्राउंड-ब्रेकिंग तकनीक के रूप में सामने वाली तकनीकों में से एक है। 

दरसल ऐसा इसलिए भी क्यूंकि ब्लॉकचेन महज़ क्रिप्टोकरेंसी में ही सीमित न रह कर वित्तीय, शैक्षणिक और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र तक को काफ़ी हद तक प्रभावित करने की क्षमता रखती है, और धीरे धीरे कर भी रही है।

लेकिन यह जरुर है कि बिटकॉइन के बारे में जाने बिना, ब्लॉकचेन तकनीक के इतिहास को कुरेदना खोखले प्रयास की तरह ही होगा। असल में नाकामोटो का व्हाइटपेपर जारी होने के तुरंत बाद, बिटकॉइन को 2009 में ओपन सोर्स कम्युनिटी के लिए पेश किया गया था।

इस बिटकॉइन के पीछे काम कर रही ब्लॉकचेन तकनीक ने इस नए डिजिटल माध्यम को लेकर लोगों के बीच भरोसा बनाने में मदद की। दरसल ब्लॉकचेन एक सार्वजनिक स्थान में महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करता है और किसी को भी इसे हटाने की अनुमति नहीं देता है। यह पारदर्शी, समय-मुद्रांकित और विकेंद्रीकृत है।

कई लोग कहते हैं,

“बिटकॉइन के लिए ब्लॉकचेन वैसा ही है जैसे ईमेल के लिए इंटरनेट।”

ब्लॉकचेन का मतलब सिर्फ़ बिटकॉइन नहीं है, यह बात 2014 तक लोगों के समझ आने लगी। दरसल यह वो वक़्त था जब दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों की रूचि बढ़ रही थी और नए उभरती इस तकनीक पर सबका दिल आ रहा था। 

ऐसे में कुछ लोगों ने ब्लॉकचेन को भी आसान भाषा में परिभाषित करना शुरू किया। आपने बहिखाता तो सुना ही होगा। दरसल ब्लॉकचेन भी एक प्रकार का खुला और विकेन्द्रीकृत बहीखाता ही है, जो दो पक्षों के बीच लेनदेन को स्थायी रूप से तीसरे पक्ष के प्रमाणीकरण की आवश्यकता के बिना रिकॉर्ड करता है।

फ़िलहाल ब्लॉकचैन प्रूफ़-ऑफ़-वर्क की अवधारणा पर संचालित होने वाली तकनीक है। इसमें एक ब्लॉक के निर्माण के लिए एक जटिल कंप्यूटर कैलकुलेशन या “माइनिंग” की जाती है। जब आप लेनदेन शुरू करते हैं, तो इसे एक ब्लॉक में बांधा जाता है। फिर माइनिंग करने वाला कंप्यूटर इस लेनदेन को सत्यापित करने के लिए कि उस ब्लॉक के भीतर का लेन-देन वैध हैं, एक प्रूफ-ऑफ-वर्क समस्या को हल करता है। यह एक बहुत ही कठिन गणितीय समस्या होती है, जिसको हल करने के लिए एक असाधारण मात्रा में कंप्यूटिंग पॉवर लगती है। समस्या को हल करने वाले पहले माईनर को ईनाम मिलता है और फिर ब्लॉकचेन पर सत्यापित लेनदेन स्टोर हो जाता।

हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी Ethereum अब इस प्रूफ़-ऑफ़-वर्क सिस्टम के बजाए, प्रूफ़-ऑफ-स्टेक सिस्टम में रुचि दर्शाती नज़र आती है। इस सिस्टम में भी एक एल्गोरिथम का ही उपयोग होता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया थोड़ी लगा है। अब ब्लॉकचेन प्रक्रिया को इस प्रणाली के चलते और अधिक सरल बनाने का भी दावा किया जाता रहा है।  

लेकिन आज भी ब्लॉकचेन नेटवर्क में प्रत्येक कंप्यूटर हर लेनदेन को प्रोसेस करता है, और इसलिए यह प्रक्रिया बहुत धीमी हो सकती है। इसलिए कई जानकारों का कहना है कि ब्लॉकचेन तकनीक को यदि और बढ़ाना है तो जरूरी है कि एक ऐसा समाधान लाया जाए जिससे बिना सुरक्षा से समझौता किये प्रत्येक लेनदेन को मान्य करने के लिए एक निर्धारित संख्या में कंप्यूटरों को चुना जा सके।

इस बीच अब जब उद्यमियों ने ब्लॉकचेन तकनीक की संभवनाओं को समझना शुरू कर दिया है, तो ऐसे में इस तकनीक में निवेश और खोज को लेकर काफ़ी वृद्धि हुई और ब्लॉकचेन आपूर्ति श्रृंखलाओं, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य सेवा, बीमा, परिवहन, मतदान, अनुबंध प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी संभवनाओं को वास्तविक की शक्ल प्रदान करते नज़र आ रही है। 

अब देखने वाली बात सिर्फ़ यह है कि दुनिया भर में सरकारों और अन्य संस्थाओं द्वारा इस तकनीक को लेकर किस प्रकार से समर्थन प्रदान किया जाता है? यह सवाल इसलिए भी मुख्य है क्यूंकि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आज भी कई देशों में सरकारें और कई ने संस्थाएं आश्वस्त नज़र नहीं आती हैं?

खैर! इस बीच इस उभरती तकनीक पर आपके लिए विचार है और इस लेख को लेकर आपका क्या मत है, हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं..!

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