ICAI विरोध: चार्टर्ड एकाउंटेंट छात्रों के चल रहे विरोध पर आख़िर क्या हैं लोगों की राय?

  • by Staff@ TSD Network
  • September 26, 2019
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शायद सभी को याद होगा कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों ने बीते सोमवार को दिल्ली के ITO के पास ICAI मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन किया था

दरसल आपको बता दें छात्र पेपर के मूल्यांकन में गड़बड़ी होने के आरोप लगाते हुए संस्थान के द्वारा पेपर फिर से जांचने की मांग कर रहे हैं। हालाँकि विरोध का तरीका पूरी तरह से लोकतांत्रिक रहा और छात्रों ने एकजुट होकर अपनी आवाज़ देशभर में पहुँचाने की कोशिश की।

इस दौरान Institute of Chartered Accountants of India मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले छात्रों में स्वाभविक रूप से उन छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जिन्होनें इस बार ICAI की परीक्षा दी है

छात्रों का आरोप है की पेपर की कापियां चेक करने में गड़बड़ी हुई है जिसके चलते बहुत से छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। हम आपको बता दें कि ICAI की परीक्षा देशभर की चुनिंदा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है और ऐसे में छात्रों द्वारा इसको लेकर अत्यधिक परिश्रम किया जाता है। और ऐसे में यदि मानवीय गलती के चलते उनका भविष्य ही अँधेरे में जाने लगे तो हम सभी को इस पर एक बार सोचना जरुर चाहिए।

काफी दिनों से कोशिश कर रहा था कि इस विषय पर लिखा जाए। लेकिन कम संसाधनों के बीच अक्सर सभी विषयों को प्रकाश में लाना थोडा मुश्किल जरुर हो जाता है। लेकिन कोशिश में ईमानदारी हो तो नामुमकिन तो कुछ भी नहीं है। 

दरसल सोशल मीडिया में रोज़ इस विषय पर एक नया विचार पढ़कर इस मुद्दे में दिलचस्पी और बढ़ती गई। ICAI जगत से जुड़ें तमाम लोगों, टीचरों, छात्रों, पूर्व छात्रों, मौजूदा CA सभी के विचारों से सोशल मीडिया भरा है। विचार हर तरह के हैं और क्यूंकि मैं इस क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं रखता तो मुझे कोई हक़ नहीं कि मैंने इस प्रतिष्ठित क्षेत्र के बारे में सही-गलत का मत रखूं या फ़िर अपना मत जाहिर करूं। 

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तो सोचा क्यों न इस क्षेत्र से ही जुड़ें लोगों और संघर्ष कर रहें छात्रों की आवाज़ आप तक पहुँचाने की छोटी सी कोशिश की जाए। तो नीचे आप जितने भी विचार देखेंगें यह सोशल मीडिया से लिए गयें हैं।

और इससे पहले ज़िन्दगी के पूरे सफ़र तक खुद को एक छात्र मनाने के नाते मैं एक बात जरुर कहना चाहूँगा, मुद्दा यह नहीं कि कितनी संख्या में कॉपियों को जांचने में अनियमितता बरती गई, मुद्दा यह है अगर एक के साथ भी ऐसी नाइंसाफी हुई है तो जरूरी है कि ICAI इसकी जवाबदेही तय कर इंसाफ करने का काम करें।

क्यूंकि यकींन मानिए एक छात्र कभी अकेला नहीं होता, उसके साथ हमेशा उसके परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति जुड़ी होती है, और उसका भविष्य उसके परिवार के साथ ही साथ कई लोगों और समाज को भी प्रभावित करता है। तो गुजारिश यही है अगर ऐसा हुआ है तो इसको ठीक करने का काम संस्थान का है और जवाबदेही भी! 

खैर! इस बीच आप भी इस विषय पर लोगों के मत पढियें, 

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