6 साल से भटक रहें हैं 10029 अभ्यर्थी, अब तक पूरी नहीं हुई राजस्थान पंचायतीराज विभाग एलडीसी-2013 भर्ती प्रक्रिया?

  • by Staff@ TSD Network
  • August 26, 2019
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देश में प्राइवेटाईजेशन तेज़ी से बढ़ रहा है। और केंद्र हो या राज्य सरकारें, सभी इसको लेकर बहुत सक्रीय और चुस्त नज़र आती हैं। होंगी भी क्यूंकि यह प्रक्रिया कई मामलों में सरकारों की प्रत्यक्ष जवाबदेही को जो खत्म कर देती है।

चलिए उस बहस में नहीं जाते हैं, लेकिन सरकारों से एक चीज़ तो अभी भी अपेक्षित है, जितनी भी भर्तियाँ सरकारी चयन बोर्ड निकालते हैं, कम से कम उनको ही अब ढंग से और समय पर पूरा कर दें।

देश में IIT-NEET, IAS-IES इत्यादि जैसे न जाने कितनी परीक्षाएं बड़ी सफ़लता से कम से कम पूरी कर ली जाती हैं। लेकिन अधिकांश परीक्षाओं में आयोजक सरकारी संस्थाएं बेबस सी नज़र क्यों आने लगती हैं? आखिर क्यों परीक्षा का कोर्ट में जाना और उसके बाद 3-4 वर्षों में कहीं अगर उम्मीद रही तो उसका परिणाम आना, विगत वर्षों में एक सहज चलन जैसा हो गया है?

ऐसी ही एक भयावह स्थिति है फ़िलहाल राजस्थान पंचायतीराज विभाग एलडीसी भर्ती-2013 की, जहाँ पिछले छः साल से यह भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बीजेपी के बाद कांग्रेस की सरकार भी बन गई। मुख्यमंत्री गहलोत जी ने भी जोर शोर से भर्ती पूरे करने के वादे भी कर दिए। लेकिन स्थिति जस की तस बनी है।

इसी प्रक्रिया से पीड़ित एक छात्र ने हमसे अपनी आपबीती बाँटी, जरा सुनिए देश के एक और युवा का दर्द, जिसको सिस्टम ने इतना असहज सा बना दिया है।

“नमस्कार! सर   

पंचायत राज ने 2013 में 19275 पद पर भर्ती निकाली जिसमें पात्रता बारहवीं कक्षा की परसेंटेज का 70 परसेंटेज निकाल कर और पहले से काम कर रहे संविदा कर्मचारी को प्रतिवर्ष 10 परसेंट बोनस अधिकतम 30 बोनस अंक एवं आरएससीआईटी कंप्यूटर कोर्स की पात्रता पर भर्ती निकाली गई। इसमें 7755 पद पर तो 2013 में ही कार्यभार ग्रहण कर लिया गया। लेकिन 15 जुलाई 2013 को हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी और मामला लांचर बेंच में चला गया। लांचर बेंच ने अपने निर्णय में 25 सितंबर 2013 को सेवा कर्मचारी को अधिकतम बोनस 15 अंक निर्धारित किया। इस निर्णय पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2016 को अनुभव अंक 30 कर दिए और भर्ती को स्वीकार किया। उस समय 1150 के लगभग पद भरे गए। फिर वसुंधरा सरकार ने भर्ती को पूरी नहीं करवाए।

कांग्रेसी सरकार आई तो उसने 10029 खाली पदों पर जल्द ही भर्ती की आस जगाई। मुख्यमंत्री जी ने लोकसभा चुनाव से 1 महीने पहले भर्ती को 1 महीने में पूरी कर जॉइनिंग देने की घोषणा की थी। कैलेंडर भी जारी हुआ लेकिन लोकसभा चुनाव आने की वजह से आचार संहिता लगने की वजह से उसे वापस रद्द कर दिया गया। लोकसभा चुनाव होने के कारण आचार संहिता लग गई और फिर से भर्ती रुक गई जो कि आज तक पूरी नहीं हो सकी।

मुझे नहीं लगता यह कांग्रेस सरकार भी इस भर्ती को पूरा करेगी लेकिन 40 परसेंट को जॉइनिंग दे दी गई और 60 परसेंट 6 साल से भटक रहे हैं यह कौन सा न्याय हुआ? क्या देश में सबको बराबर का हक़ नहीं? 

धन्यवाद!

जरा सोचिए अकेले एक प्रदेश की एक परीक्षा को लेकर ही 10029 अभ्यर्थियों का भविष्य पिछले 6 साल से अटका कर रखा गया है? इस मामलें में भी जब हमनें http://www.rajpanchayat.rajasthan.gov.in की वेबसाइट में जाकर देखा तो विभाग की तरफ से सबसे नवीनतम नोटिफिकेशन यह दिखा;

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विभाग ऐसी नोटिस जारी कर अपना पल्ला तो झाड़ सकता है। लेकिन सोचिए उन 10029 अभ्यर्थियों का जो पिछले छः साल से भर्ती के पूरा होने का इंतजार कर रहें हैं।

इस बीच हमारी नज़र 5 अगस्त को दैनिक भास्कर द्वारा इस विषय को लेकर प्रकाशित एक खबर पर भी गई, जिसके अनुसार पंचायतीराज विभाग में 6 साल पहले निकाली गई एलडीसी भर्ती-2013 के खाली 10,029 पदों को भरने का मामला वित्त विभाग में अटका हुआ है। इन पदों पर भर्ती होने पर सरकार को पहले दो साल में 380 करोड़ और इसके बाद हर साल 350 करोड़ रुपए चाहिए।

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सवाल ये भी बनता है कि यदि वित्त विभाग के पास इतना पैसा नहीं था कि इन भर्तियों को स्वीकृत किया जा सके, तो भला किसकी रजामंदी से यह भर्तियाँ निकली गई? क्या सिर्फ़ झूठे वादों को एक खोखली शक्ल देने के लिए सरकारों ने यह खेल खेला? क्या भर्ती घोषित करने से पहले वित्त विभाग से सलाह नहीं ली गई? इसकी जाँच भी होनी चाहिए। आखिर देश के युवाओं के साथ ऐसा मजाक करने का हक़ किस सरकार को मिला है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि देश और प्रदेश के चयन विभाग दिनरात नौकरियों बाँट रहें हैं? हर रोज़ एक नई भर्ती निकाल कर युवाओं को रोजगार देने की कोशिश कर रहें हैं? जिसके चलते उनके पास व्यस्तता इतनी है कि चीज़ें संभालना मुश्किल होता जा रहा है?

हमें तो ऐसी बम्पर भर्तियाँ कहीं होती नज़र नहीं आई? तो फ़िर अगर ऐसा नहीं है तो क्यों लगभग हर प्रदेश में आज के समय भर्ती कोई भी हो वह 3 से 4 साल के भीतर पूर्ण हो ही नहीं पा रही है? इसको संस्थाओं और सरकारों की लचरता न कहा जाए तो और क्या कहें?

इस बीच विभाग से हमारी यही अपील है कि 10029 कोई छोटी संख्या नहीं है। उन युवाओं के दर्द को भी आप समझिये और जिन भी कारणों से यह भर्ती प्रक्रिया नहीं हो पा रही है, कम से कम उसको ही स्पष्ट रूप से अभ्यर्थियों के बीच रखें और उन्हें उतने ही स्पष्ट तौर पर बताएं कि आखिर इन भर्तियों को कितने दिनों में पूरा कर लिया जाएगा?

देश के युवा आस खो रहें हैं, सरकारों से भी, अनेकों केंद्र और राज्य स्तरीय चयन बोर्ड्स से भी। और कहीं न कहीं ऐसी स्थिति इसलिए भी है क्यूंकि देशभर में, सवाल पूछने वाली मीडिया और जवाब देने वाली सरकारें दोनों ही भर्ती प्रक्रियाओं की इस स्थिति को लेकर काफ़ी सहज हो चुकें हैं और युवा अभ्यर्थी की दशा उतनी ही ‘असहज़’!

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