Class 8 History Chapter 1 Hindi NCERT Solution & Summary || कक्षा 8 इतिहास अध्याय 1

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Class 8 History Chapter 1 Hindi: अगर आपसे पूछा जाए History या इतिहास क्या होता है, तो इसको आप सिर्फ़ एक लाइन में बता सकतें हैं, “कब, कैसे और कहाँ का जवाब!” और इन्हीं जवाबों को आसान बनाने के लिए इतिहास को हमेशा समय, दौर या घटनाओं के आधार पर बाँटा जाता है।

भारत में ब्रिटिश इतिहासकारों ने अक्सर इतिहास को गवर्नर-जनरल के शासनकाल के आधार पर बाँटा है। आपको बता दें भारत में ब्रिटिश हुकूमत के सबसे पहले Governor-General, Warren Hastings थे। वहीं आख़िरी Governor-General या कहें तो Viceroy, Lord Mountbatten थे।

History को किस आधार पर बाँटा जाए? ये कैसे तय होता है? (How do we periodise?)

1817 में स्कॉटलैंड के Economist और Political Philosopher, James Mill ने अपनी एक किताब A History of British India पेश की थी, जिसमें Mill ने भारत के इतिहास को Hindu, Muslim और British करके तीन भागों में बाँटा था।

इस किताब के अनुसार, Mill मानते थे कि एशियाई समाज यूरोपीय समाज से काफ़ी पीछे था और अंग्रेजों के आने से पहले भारत में सिर्फ़ हिंदू व मुस्लिम तानाशाहों का राज चलता था, और वो धर्म, जाति व छुआछूत जैसी चीजों को लेकर ही लड़ते रहते थे।

Mill ने अपनी किताब में लिखा कि अंग्रेजों को पूरे भारत में क़ब्ज़ा करके अपना राज चलाना चाहिए, क्योंकि Mill के अनुसार British लोग ही भारत में सभ्यता, कला और क़ानून लाए थे और उसको बढ़ावा दिया था। लेकिन इसमें मुख्य दिक्कत ये आई कि धर्म के आधार पर इतिहास को बाँटते वक़्त हम एक ही दौर में मौजूद सभी धर्मों के देश पर पड़ने वाले प्रभाव को सही तरीक़े से नहीं समझ सकतें, क्योंकि हर दौर में मौजूद तो सभी धर्म थे, भले कुछ ने कभी राज किया कुछ ने कभी।

ज़ाहिर सी बात है Mill के इस डिविज़न को बहुत से लोगों ने नकारा और इसलिए भारतीय इतिहासकारों ने देश के इतिहास को Ancient (प्राचीन), Medieval (मध्यकालीन) और Modern (आधुनिक) करके तीन भागों में बाँटा, जिसको लेकर विवाद भी रहा क्योंकि लोगों का कहना था कि ये तरीक़ा भी एक तरह का यूरोपीय तरीक़ा ही है, जो सिर्फ़ आधुनिक यानी Modern दौर को सही और सभ्य साबित करने पर ज़ोर देता है।

Class 8 History Chapter 1 Hindi: इस बीच आप इतिहास में एक और Word अक्सर देखते हैं, और वो है ‘Colonial’ (औपनिवेशक) (What is Colonial?)

दरसल जब एक देश किसी दूसरे देश पर हावी होकर वहाँ मानों राज सा करने लगे और वहाँ अपने फ़ायदे के लिए राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव लानें लगे, तो इस प्रॉसेस को ही औपनिवेशिकरण (Colonisation) कहा जाता है।

लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये बदलाव देश के हर Class (वर्ग) के लिए एक जैसे नहीं होते हैं, और इसलिए NCERT की Book को Our Past नहीं बल्कि Our Pasts का नाम दिया गया है।

अब इतिहास को पढ़ना शुरू करने से पहले ये जानना बेहद ज़रूरी है कि इतिहास में क्या हुआ ,क्या लिखना है, इसका सोर्स कहाँ से लिया जाता है? (Source For Writing History)

आप भारत का इतिहास पढ़ेंगें तो क़रीब क़रीब पिछले 250 सालों का इतिहास आपको हर मशहूर इतिहास की किताब में नज़र आ जाएगा, लेकिन इसको कहाँ से लिखा गया? कौन से Verified Sources के ज़रिए घटनाओं का पता चलता है? ये सवाल बहुत आम है। तो ये Sources कुछ यूँ होते हैं;

1. प्रशासनिक रिकॉर्ड (Administration Records):
British भारत में राज करते वक़्त भी हर Instruction, Plan, Policy, Decision, Agreement, Investigation को लिखित तौर पर संभाल कर रखते थे। इसके लिए उन्होंने हर तहसील, कलेक्ट्रेट, कमीशनरी आदि स्तरों पर Record Rooms बनवाए थे। 19वी सदी की शुरुआत में ये Document पहले हाथों से लिखे जाते थे और फिर 19वी सदी के मध्य तक प्रिंटिंग आदि की शुरुआत होने के बाद इनको प्रिंट करके भी रखा जाने लगा।

2. सर्वे (Surveys)
अंग्रेज ये मानते थे कि किसी देश में राज करने के लिए उसको पूरी तरह जानना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए 19वी सदी की शुरुआत में उन्होंने पूरे भारत का मैप तैयार करने के लिए एक देशव्यापी सर्वे भी करवाया। इसी दौरान उन्होंने देश के गाँवों में भी सर्वे करवाए, जिसमें मिट्टी, फसल, जानवर आदि चीजों की जानकारी इक्कठा की गई। 19वी सदी के आख़िर तक में हर 10 साल में देश की जनगणना की जाने लगी।

लेकिन ये Official Records सारी और हर पहलू की जानकारी नहीं देते?

दरसल कोई भी सरकार सरकारी Documents में इतिहास के नज़रिए से वहीं चीज़ें लिखती और संजोती है, जिसमें उसका फ़ायदा हो या जो उसको सही लगे। इसलिए आम जनता या समाज के हर तबके के जुड़ी सच्चाई उसके ज़रिए सामने नहीं आ पाती है।

लेकिन तो फिर इतिहास के उन पहलुओं को कैसे समझा और लिखा गया? दरसल इसके लिए अक्सर लोगों की डायरी, उस वक्त के न्यूज़पेपर्स, कविताओं, स्थानीय बाज़ारों में छपने वाली छोटी मोटी किताबों, नॉवेल, स्थानीय राजनीतिक पार्टी के Documents आदि का सहारा लिया जाता है।

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