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“नीर की पीर” मंचन के जरिये दिया ‘जल संरक्षण’ का संदेश

  • by Team TSD
  • February 3, 2020

समाजिक वानिकी प्रभाग, प्रयागराज एवं शहर की बहुचर्चित नाट्य संस्थान नुक्कड़ नाट्य अभिनय संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में 2 फरवरी 2020 को लोगों में जागरूकता फ़ैलाने के मकसद से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

दरसल 2 फरवरी को प्राकृतिक जल स्रोत संरक्षण दिवस के मौके पर मदन मोहन मालवीय (मिंटो) पार्क नया यमुना पुल, प्रयागराज में सुबह 11:00 बजे संतोष कुमार गुप्ता द्वारा लिखित एवम् युवा रंगकर्मी कृष्ण कुमार मौर्य द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक “नीर की पीर ” का मंचन हुआ।

नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने दिखाया की जल का सबसे बड़ा स्रोत हमारी नदियाँ हैं। उसमें भी गंगा नदी का नाम सबसे ऊपर आता है। यह भारत की न केवल जीवन रेखा है, बल्कि भारतीय सभ्यता की पालना रही है।

साथ ही सैकड़ों तरह की मछलियों एवं जीव-जन्तुओं की यह शरण-स्थली भी है। इनमें से कई जन्तु दुर्लभ, संकटापन्न एवं स्थानिक हैं। जैसे गांगेय डॉल्फिन, घड़ियाल, मुलायम कवच वाले कछुए, संकुची मछली इत्यादि अब वह भी खत्म हो रही है, क्योंकि हम इंसानों ने जल को इतना प्रदूषित कर दिया जल स्रोतों को संरक्षित नहीं किया।

साथ ही यह भी बताया गया कि किस तरह भू माफिया हमारे नदी, ताल तलैया पर कब्जा कर प्राकृतिक जल स्रोतों का हनन कर रहे हैं।

नुक्कड़ नाटक के निर्देशक कृष्ण कुमार मौर्या ने कहा –

“एक समय पर दुनिया पर अधिकार रखने वाले ये डायनासोर, एक शोध के अनुसार, भोजन की कमी के कारण समाप्त हो गए थे, तो यह शंका भी निर्मूल नहीं कि एक दिन मनुष्य बिना पानी के समाप्त हो जाएँगे?”

इस बीच आपको बता दें इसमें भाग लेने वाले कलाकारों में अभिषेक मिश्रा, आनंद प्रकाश शर्मा ,संजीव कुमार, प्रशांत कुमार, हेमलता साहू इत्यादि रहे।

मंचन के दौरान डी. एफ. ओ. श्री वाई पी शुक्ला , मुख्य वन संरक्षक डॉ. दुबे, वैज्ञानिक कुमुद दुबे के अलावा अन्य सभी रेंजर एवं कर्मचारी गण मौजूद रहे।

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