July 3, 2020
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भारत में महज़ 33% महिलाएं ही ले पाती हैं ख़ुद से निवेश संबंधी निर्णय

  • by Team TSD
  • June 12, 2019

‘इन्वेस्टमेंट’ या ‘निवेश’ हाल ही के दौर में सबसे महत्वपूर्ण शब्द बन गया है। आज से ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था के निर्माण से ही ‘निवेश’ का हर स्तर में मुख्य भूमिका रही है।

फ़िर भले ही वह किसी संस्थान के सन्दर्भ में हो, सरकार के संबंध में या फ़िर अकेले किसी व्यक्ति के संबंध में, हर स्तर पर छोटा बड़ा हर निवेश महत्वपूर्ण ही होता है

लेकिन क्या कभी आपने सोचा है निवेश जैसी महत्वपूर्ण चीज़ भी समाज की कुछ कुरीतियों और अघोषित नियमों का शिकार है। जी हाँ! दरसल निवेश भी कहीं न कहीं समाज में लिंग भेद नीति का शिकार है। और इस बात को हर कोई समझता है, लेकिन कभी हमनें इस विषय में इतने व्यापक रूप से शायद ही सोचा हो?   

लेकिन हाल ही में डीएसपी म्यूचुअल फंड द्वारा करवाए गये एक सर्वे से कुछ ऐसे आँकड़े सामने आयें, जिन्होंने कथित तौर पर मॉडर्न हो चुके इस समाज के सामने एक बार फ़िर से प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया।    

इस अध्ययन में सामने आया कि 64% पुरुषों की तुलना में केवल 33% महिलाएं ही स्वतंत्र रूप से निवेश संबंधी निर्णय ले पाती हैं। और इनमें से भी कुछ महिलाएं महज़ अपने पति से प्रोत्साहन के कारण ही मुख्य रूप से ऐसे निवेश के फैसले लेती हैं।

मात्र 30% महिलाएं ही अपने स्वयं के निर्णय के चलते निवेश संबंधी क़दम उठाती हैं। हालाँकि इस सर्वे में यह भी सामने आया कि शादीशुदा, होममेकर व वर्किंग महिलाएं निवेश को प्राथमिकता देने की मानसिकता रखता है।

इस सर्वे के दौरान 39% महिलाओं ने कहा कि उन्होंने पहले निवेश की योजना बनाई और उसके बाद ही अपने मासिक खर्चों की रुपरेखा तैयार की।

इस बीच एक दिलचस्प आँकड़ा जो सामने आया उससे पता चलता है कि कि महिलाएं निवेश संबंधी किश्तों इत्यादि को लेकर पुरुषों के मुकाबलें कहीं अधिक अनुशासित होतीं हैं। और यह भी एक मुख्य कारण हो सकता है कि कंपनियों को निवेश संबंधी सुविधाओं के लिए और अधिक महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।

हालांकि इस आँकड़ो ने यह भी स्पष्ट किया कि जब भी बड़ी खरीदारी या निवेश संबंधी निर्णय की बात आती है, तो निर्णय लेने में पुरुष हावी दिखाई पड़ते हैं, खासकर कार या घर खरीदते समय।

वहीँ दूसरी ओर यह पाया गया कि सोने/आभूषणों की खरीदारी, दिन-प्रतिदिन की घरेलू खरीद और अन्य वस्तुओं के ख़रीद और निवेश में महिलाओं की बड़ी भूमिका होती है।

और वही अगर बात बाजार आधारित इन्वेस्टमेंट अर्थात् स्टॉक, इक्विटी एमएफ आदि की करें तों इस सेगमेंट में महज़ 12% महिलाएं ही पूर्णतः अपने निर्णय के आधार पर निवेश संबंधी कदम उठाती हैं। जबकि पुरुषों में यह आँकड़ा 31% रहा। 

इस बीच इस सर्वे में यह भी सामने आया कि ज्यादातर महिलाएं बच्चे की शिक्षा, घर, बच्चे की शादी, कर्ज मुक्त जीवन और उच्च जीवन स्तर जैसे लक्ष्यों के साथ निवेश करती हैं। वहीँ अधिकांश पुरुषों का लक्ष्य अपना उद्यम शुरू करना या सेवानिवृत्ति की योजना संबंधी होता है।

इस सर्वे में यह भी पता लगा कि महिलाओं द्वारा किये गये निवेश में पति की 40% और पिता की 27% की भूमिका होती है। वहीँ दूसरी ओर पुरुषों द्वारा किये गये निवेश में उनके पिता की 40% और उनके सहयोगियों की 35% भूमिका होती है।

इस बीच हम आपको बता दें कि इस सर्वे में 4 महानगरों; मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बैंगलोर और 4 गैर-महानगर; इंदौर, कोच्चि, लुधियाना और गुवाहाटी से 25 से 60 वर्ष तक की उम्र के 1853 पुरुषों और 2160 महिलाओं को शामिल किया गया।  

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