RSMSSB द्वारा ‘छात्रावास अधीक्षक-2016’ की भर्ती प्रक्रिया अभी तक नहीं हुई पूरी? | TSD Report

  • by Staff@ TSD Network
  • August 25, 2019
RSMSSB

देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। और इसका मुख्य कारण कम अवसर से भी अधिक मौजूदा सिस्टम का लचर रवैया नज़र आता है।

जी हाँ! राजनेता नए रोजगार सृजन के तरीकों पर तो अक्सर बोलते नज़र आ जाते हैं, लेकिन अभी भी राजनेता प्रादेशिक सरकारी चयन समितियों व संस्थाओं के लचर रवैये के चलते मौजूदा नौकरियों और अवसरों के अटकें होने की बात पर ख़ामोश से हो जातें हैं। और इससे भी बुरा यह कि नेताओं के साथ साथ उनसे प्रश्न पूछने वाली मीडिया भी अब खामोश सी नज़र आने लगी है। अब मीडिया में भी गिने चुने नाम हैं जो इस दौर की वास्तविक परेशानियों पर सवाल खड़े करते नज़र आते हैं।

लेकिन वह भी अकेले कितना कर सकतें हैं। पर अब हमनें उनकी इन कोशिशों में अपना थोडा सहयोग देने का फ़ैसला किया है। और जिसके चलते हम भी अब देश पटल पर केंद्र व राज्य सरकारों और संस्थाओं की ऐसी ही लचरता से पीड़ित लोगों की आवाज़ को पहुँचाने की कोशिश कर रहें हैं।

और इस बार राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) की लचरता के शिकार एक पीड़ित ने निम्न रूप से हमसे अपनी बात साझा कि,

“नमस्कार!  

2016 में बीजेपी सरकार ने ग्राम सेवक (ग्राम विकास अधिकारी) एवं पंचायत सचिव तथा छात्रावास अधीक्षक ग्रेड द्वितीय की से सयुंक्त भर्ती का विज्ञापन दिनांक 29 अक्टुबर 2016 को जारी किया था। राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा ग्राम सेवक (ग्राम विकास अधिकारी) एवं पंचायत सचिव के 3648 पदों तथा छात्रावास अधीक्षक ग्रेड द्वितीय के 300 पदों (बाद में बढ़ा कर 451 कर दी गयी थी) पर भर्ती करनी थी।

सयुंक्त भर्ती परीक्षा का आयोजन दिनांक 18 दिसम्बर 2016 को किया गया। दो अलग अलग विभाग की भर्तियां होने के कारण परीक्षा परिणाम उलज के रह गया। ग्राम सेवक (ग्राम विकास अधिकारी) एवं पंचायत सचिव के पदों को वरीयता देते हुए दस्तावेज सत्यापन के परीक्षा परिणाम दिनांक 04 जुलाई 2017 को जारी किया गया तथा छात्रावास अधीक्षक को दूसरी वरीयता देते हुए दस्तावेज सत्यापन के परीक्षा परिणाम दिनांक 18 अक्टूबर 2017 को जारी किया गया।

इस प्रकार ग्रामसेवक के पदों पर जोइन न करने के कारण खाली रहे पदों पर अस्थाई अभियर्थियों की दूसरी सूची जारी कर दी उनमें छात्रावास अधीक्षक के पदों पर अंतिम रूप से चयनित अभियर्थियों (जिन्होंने छात्रावास अधीक्षक का पदभार ग्रहण भी कर लिया था) को भी शामिल कर लिया गया, जिससे वे ग्रामसेवक भी बन गए और छात्रावास अधीक्षक के पद से रिजाइन दे दिया जिससे छात्रावास अधीक्षक के पद खाली रह गए।

छात्रावास अधीक्षक के खाली रह गए पदों को भरने के बीजेपी ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में खाली पदों के 1.5 गुने अस्थायी चयनितों की सूची दिनांक 30 नवंबर 2018 को जारी कर दी, तथा दिसंबर में सरकार बदल गयी। लम्बे समय तक नई सरकार ने भर्ती को पूरा करने में आनाकानी करती रही, संघर्ष के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने दस्तावेज सत्यापन भी दिनांक 10 व 11 जून 2019 को करवा लिया तथा राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RMSSB) ने अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की अभिशंसा भी कर दी पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा नियुक्ति आदेश जारी नहीं किये जा रहे है। बेरोजगारी भरे दौर में कितना इंतजार और करना पड़ेगा?

धन्यवाद!

इस शिकायत के बाद जब हमनें खुद http://rsmssb.rajasthan.gov.in की वेबसाइट पर जाकर नोटिस बोर्ड देखा, तो हमें इस भर्ती को लेकर सबसे नवीनतम नोटिफिकेशन यह मिला:

 

हालाँकि यह जरुर है कि ऐसी सालों की भर्ती में महज़ 1 महीनें पुराना यह नोटिफिकेशन छात्रों को यह राहत तो दे सकता है कि इस दिशा में चयन बोर्ड पूरी तरह से उदासीन नहीं है, लेकिन जरा सोचिए बेरोजगारी और महंगाई के इस दौर में भला हमारे अधिकतर प्रदेश चयन बोर्ड की यह दशा क्यूँ है कि एक भर्ती को आए हुए 3 से 4 साल हो जातें हैं, लेकिन उसके बाद भी शायद ही कहीं जाकर वह प्रक्रिया पूरी होती है?

हालाँकि मैसेज कर आग्रह करने वाले पीड़ित छात्र ने हमें इस बात की भी जानकारी दी कि इससे संबंधित रिजल्ट आज भी RSMSSB की वेबसाइट पर उपलब्ध है। जिसको आप यहाँ क्लिक कर देख सकतें हैं।

सवाल भर्ती के पूरे होने और न होने से ज्यादा समय सीमा का भी है। आज के दौर में आर्थिक रूप से कमजोर कई विद्यार्थी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी हेतु घरों से दूर किराये के घर लेकर कोचिंग इत्यादि में मोटी फ़ीस देकर किसी भर्ती की तैयारी करतें हैं। ऐसे में उस भर्ती के आने और आने के बाद भी प्रक्रिया पूरी होने तक का समयकाल अगर 3-4 वर्षों का होने लगेगा तो भला आप ही सोचिए उस छात्र और उसकी पढ़ाई के लिए किसी तरह से पैसे जुटा रहे उनके माँ-बाप को इस दौरान किस मानसिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?

कभी जाइए ऐसे किसी PG या हॉस्टल में जहाँ दूर गाँवों से सरकारी परीक्षा की तैयारी करने आए छात्र रहते हों? कभी पूछिए उनकी और उनके घर वालों की मानसिक और आर्थिक स्थिति का हाल, यकींन मानिए आपकी रूह भी एक पल को काँप उठेगी, मन करेगा ज़माने भर को और उन जवाबदेह संस्थाओं को चिल्ला चिल्ला कर उनका हाल बता डालें शायद कहीं तो उनकी सुन ली जाए और देश में भर्तियों को लेकर चला यह चलन जल्द दूर हो!

खैर! और बुरा यह है कि सवाल पूछने वालें पत्रकार ऐसी स्थितियों पर जितने खामोश और सहज होते जा रहें हैं, पीड़ित छात्र उतने ही असहज़ से नज़र आने लगें हैं।

खैर! इस बीच हमारी राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) से यही गुजारिश है कि इन भर्तियों को लेकर जल्द से जल्द कोई सार्थक कदम उठाएं और छात्रों के बीच फ़िर से विश्वसनीयता कायम कर उनके हौसलें को बनाये रखने का उन्हें एक कारण दें।

Facebook Comments
Staff@ TSD Network

Our hard-working staff writing team | You can reach us at 'contact@tsdnetwork.com'
  • facebook
  • twitter
  • linkedIn
  • instagram