May 29, 2020
  • facebook
  • twitter
  • linkedin
  • pinterest
  • instagram
save_aarey_forest

पेड़ों और जंगलों को कब तक चुकानी होगी ‘विकास’ की क़ीमत?

  • by Team TSD
  • September 20, 2019

मुंबई में पिछले कई वर्षों से आरे वन (Aarey Forest) में मौजूद 2,702 पेड़ों को बचाने की मुहीम चल रही है। दरसल मुंबई मेट्रो-3 के लिए एक कार शेड के निर्माण के चलते 2,702 पेड़ों को कटाने का प्रस्ताव जारी किया गया है

इस मुहीम के तहत मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) से यह मांग की जा रही  है कि मेट्रो कार शेड के लिए अन्य किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार किया जाए जहाँ कम से कम पेड़ों को काटने की जरूरत पड़े।

इस बीच हम आपको बता दें कि अब तक इस सिलसिले में कार्यवाई कैसे आगे बढ़ी है;

 अपडेट – 15 अप्रैल, 2019

सुप्रीम कोर्ट ने आरे कंजर्वेशन ग्रुप द्वारा दायर अर्जी (जिसमें ऐरेना कॉलोनी में आने वाली प्रस्तावित मेट्रो कार शेड के लिए वैकल्पिक स्थल की मांग की गई थी) को खारिज करते हुआ कहा कि वैकल्पिक विकल्पों को MMRCL और एक राज्य द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति द्वारा विचार किया गया लेकिन यह मुमकिन नहीं है।

अपडेट – 8 जुलाई 2019

बीएमसी ने मेट्रो कार शेड के लिए 2702 पेड़ों की कटाई / रोपाई पर नागरिकों की आपत्तियों को सुनने के लिए एक सार्वजनिक सुनवाई की। इस सुनवाई में 800 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया, और उन्होंने पेड़ काटने के खिलाफ 82,000 से अधिक ईमेल (73,000 Jhatkaa.org सदस्यों सहित) प्राप्त किए। 

अपडेट – 8 अगस्त 2019

इस जन सुनवाई के एक महीने बाद, बीएमसी का ट्री अथॉरिटी मुंबई मेट्रो के आरे कॉलोनी में 2,702 पेड़ों को काटने के प्रस्ताव को टालने के लिए तैयार है। लेकिन इन पेड़ों को काटने के निर्णय को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया गया है।

अपडेट – 29 अगस्त 2019

बीएमसी के ट्री अथॉरिटी ने 29 अगस्त को उस कॉलोनी के 2238 पेड़ों को काटने के आदेश को वापस लेने वाले प्रस्ताव को फ़िर से न मंजूर कर दिया। शिवसेना के नगरसेवक यशवंत जाधव ने कहा कि शिवसेना वनों की कटाई के खिलाफ थी, लेकिन भाजपा और राकांपा इसके पक्ष में थे। 


इस बीच सरकार का एक और दिलचस्प बयान सामने आया महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को गुरुवार को बताया कि मुंबई मेट्रो डिपो के लिए पेड़ों की कटाई पर विरोध करने वाले NGO की मांगों के अनुसार, Aarey क्षेत्र को जंगल का टैग नहीं दिया जा सकता और सिर्फ़ इसलिए तो बिल्कुल भी नहीं क्यूंकि वह हराभरा है।  

सरकारी काउंसल आशुतोष कुंभकोनी और अनिल साखरे ने Vanashakti नामक एक एनजीओ द्वारा दायर याचिका को खारिज करने की मांग की। इसमें मांग की गई थी कि उपनगरीय गोरेगांव में आरे क्षेत्र को जंगल के रूप में संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया जाए।

इस दौरान कुंभकोनी ने अदालत को यह भी बताया कि उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने पिछले साल अक्टूबर में एक कार्यकर्ता, जोरू बाथेना द्वारा दायर एक ऐसी ही याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें Aarey को जंगल का टैग देने की मांग की गई थी।

याचिका में बाथेना ने Aarey पर मेट्रो कार शेड के प्रस्तावित निर्माण को चुनौती दी थी। कुंभकी ने कहा,

“उस याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि Aarey को जंगल का टैग देना गलत होगा।”

साथ ही सरकार के वकील, कुंभकोनी ने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ एक अपील सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की गई है, जहाँ इसकी सुनवाई लंबित है।

कुंभकोनी के अनुसार,

“अब शीर्ष अदालत को ही इस मुद्दे का फैसला करने दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट  ने अपना फैसला पहले ही दे दिया है। और जब पहले ही हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को सुना जा चुका है और फ़ैसला भी दिया जा चुका है, तो फिर से इसको उसी कोर्ट में उठाने का क्या मतलब निकलता है?”

इस बीच हम आपको बता दें कि 1,287 हेक्टेयर में फैले संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे इस Aarey कॉलोनी को महानगर का प्रमुख Green Lung भी कहा जाता है। कई बॉलीवुड हस्तियों और राजनेताओं ने भी Aarey में पेड़ों को काटने के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का समर्थन किया है।

इस बीच क़ानूनी दांवपेच जो भीं हों लेकिन समाज, सरकार और सभी संस्थाओं द्वारा ये सोचे जाने का वक़्त आ गया है कि आखिर कब तक पेड़ों और जंगल रूपी पूरे तंत्र का विनाश करते हुए विकास को तर्जी दी जाती रहेगी?

खैर! इस विषय में शायद आपको या किसी को भी बहुत अधिक समझना बेईमानी ही हो, क्यूंकि जानते हम सभी हैं, लेकिन बस बोलते तब हैं जब उससे खुद का निजी नुकसान न हों! बुरा लगा? लेकिन सच यही है, या कहूँ तो कड़वा सच!

खैर! इस बीच यूँ ही इंटरनेट में सर्च करते हुए एक डाक्यूमेंट्री मिली आप भी जरुर देखिएगा, शायद दो पल के लिए आपके अन्दर भी पेड़ों के प्रति प्रेम जाग जाए?

Facebook Comments
Team TSD

A hard-working team, full of creativity, innovation, and knowledge of digital media. | You can reach us at thesocialdigital@gmail.com
  • facebook
  • twitter
  • linkedIn
  • instagram
Don`t copy text!