कभी अख़बारों और टीवी में बड़े-बड़े विज्ञापन देने वाला ‘IIPM’ और ‘अरिंदम चौधरी’ कहाँ हुए गायब?

  • by Staff@ TSD Network
  • September 16, 2019
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अगर आप 2005 से 2010 तक के दौर में अख़बारों और टेलीविज़न से एक पाठक और दर्शक की तरह भी जुड़े हुए थे, तो शायद ही आपको ‘IIPM’ और ‘अरिंदम चौधरी’ का नाम न याद हो?

जी हाँ! कभी अख़बारों के फ्रंट पेज में बड़े बड़े विज्ञापन तो कभी टीवी में किसी 7-स्टार होटल की तरह दिखने वाला कॉलेज कैंपस, यही पहचान से बन गये थे IIPM यानि Indian Institute of Planning and Management की। और साथ ही उस वक़्त हमेशा सुर्ख़ियों में दिखने वाले अरिंदम चौधरी भी प्रमुख तौर पर इस कॉलेज का चेहरा बन गये थे।

दरसल अरिंदम चौधरी के मुख्य चार बिज़नेस थे, मैनेजमेंट एजुकेशन, कन्सल्टिंग, ह्यूमन रिसोर्सेस और मीडिया। और इनमें से सबसे चर्चित रहा उनका मैंनेजमेंट एजुकेशन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (IIPM) है।

हम आपको बता दें कि एक वक़्त इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार 2010-11 में अरिंदम की इन कंपनियों ने कुल 533 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया था। जिसमें से अकेले IIPM ने ही 349 करोड़ रुपए का राजस्व कमाया था।

लेकिन आखिर क्या हुआ जो अचनाक ही अरिंदम और IIPM मीडिया और सार्वजानिक दुनिया से नदारद से रहने लगे? न कहीं IIPM का जिक्र न कहीं प्रमुखता से अरिंदम की मौजूदगी।

दरसल अगर आप इंटरनेट से ये सवाल करेंगें तो आपको Wikipedia बाबा बतायेंगें

“दरसल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (IIPM) एक गैर-मान्यता प्राप्त संस्थान है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है,जिसकी पहले भारत भर में 18 शाखाएँ थीं। 

झूठे विज्ञापनों के लिए भी संस्थान की व्यापक रूप से आलोचना की गई है। कई विवादों के बाद संस्थान के डीन अरिंदम चौधरी ने दिल्ली में एक को छोड़कर पूरे भारत में सभी परिसरों को बंद करने का फैसला किया।

1973 में स्थापित, संस्थान राष्ट्रीय आर्थिक नियोजन और उद्यमिता में स्नातक (Undergraduate), स्नातकोत्तर (Postgraduate) और डॉक्टरेट (Doctoral) के साथ अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम की भी पेशकश करता था

लेकिन IIPM को UGC या ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, और यह सार्वजनिक भारतीय प्रबंधन संस्थानों से संबद्ध भी नहीं है।

UGC और AICTE ने बार-बार सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वे IIPM को मान्यता नहीं देते हैं और इसके टेक्नीकल कोर्स अमान्य हैं।

इस पर IIPM ने यह भी कहा था कि वह यह डिग्री जारी नहीं करता है और न ही विश्वविद्यालय होने का दावा करता है।

लेकिन सितंबर 2014 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने छात्रों को गुमराह करने के लिए IIPM को बंद कर दिया और इसके द्वारा MBA, BBA, प्रबंधन पाठ्यक्रम और B-School जैसे शब्दों का उपयोग करने पर रोक लगा दी।

जुलाई 2015 में, IIPM ने घोषणा की कि वह सीधे शिक्षा कार्यक्रमों की पेशकश बंद कर देगा और दिल्ली के बाहर अपने सभी परिसरों को भी बंद कर देगा। इसके बाद वह दिल्ली में एक शोध और प्रशिक्षण संस्थान के रूप में काम करेगा।”

इस बीच कहा ये भी जाता है कि जब संस्थान अपने चरम पर था तो ऐसे वक्त भी कई छात्रों और पत्रकारों ने इसकी धोखाधड़ी के खिलाफ़ आवाज़ उठाई लेकिन संस्थान उनकी आवाज़ को दबाने के लिए उन्हीं पर मुकदमें कर देता था। जिसके शिकार खुद Outlook Group के पूर्व अध्यक्ष और प्रकाशक एवं Career360 पत्रिका के संस्थापक, महेश्वरी पेरी भी हुए

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हालाँकि अंत में कोर्ट में भी उनकी जीत हुई। इस बीच हम आपको बता दें कि खुद अरिंदम एक टीवी शो पर यह कह चुके हैं कि

“आप मेरे कपड़े पहनने के तरीकों की आलोचना करेंगे तो मैं शायद आपसे कुछ न कहूं, लेकिन अगर आप मेरे बिज़नेस पर सवाल उठाएंगे तो मैं आप पर केस कर दूंगा।”

असल में इकोनॉमिक टाइम्स की एक पुरानी रिपोर्ट में यह बताया गया कि अरिंदम के अनुसार IIPM में हर साल 3500 स्ट़डेंट एडमिशन लेते थे और प्रत्येक स्टूडेंट से 14.75 लाख से 18.75 लाख तक की कोर्स फीस वसूली जाती थी है।

इस बीच IIPM की पूरी कहानी बयाँ करते हुए The Lallantop की एक रिपोर्ट भी आई है, शायद मैं लिख कर सब न बता पाऊं तो आप इसको जरुर देखिएगा!

 

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