ड्रोन के जरिये ‘ब्लड ट्रांसपोर्ट’ करने वाला भारत का पहला राज्य बना उत्तराखंड

  • by Staff@ TSD Network
  • June 10, 2019
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इस बात में कोई शक नहीं है कि भारत में तकनीकी प्रसार अब छोटे स्तर से आगे बढ़कर व्यापक रूप से अपनी जगह बनाता नज़र आ रहा है। फ़िर भले वो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस हो ब्लॉकचेन या फ़िर ड्रोन तकनीक।

जी हाँ! और आज देश के सामने इसका एक उदारहण भी पेश किया गया। दरसल देश में पहली बार एक यूएवी (मानवरहित हवाई वाहन) / ड्रोन के जरिये दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से राज्य के सबसे बड़े अस्पतालों में ‘ब्लड’ पहुँचाया (ट्रांसपोर्ट) किया गया।

हालाँकि जब विश्व स्तर में कई देश आज भी ड्रोन के ऐसे इस्तेमाल की संभवनाओं को लेकर सुस्त नज़र आते हैं, ऐसे में भारत द्वारा इस तकनीकी संभावना को एक व्यावहारिक रूप देना काफ़ी सराहनीय कदम है।

भारत में कई क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियों के वजह से स्वास्थ्य संबंधी प्रबंधन पुख्ता तौर पर मौजूद नहीं करवाए जा पाते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में ड्रोन एक गेम-चेंजर साबित हो सकतें हैं।

दरसल इस ड्रोन को प्रतिष्ठित आईआईटी कानपुर द्वारा इनक्यूबेट किये गये एक स्टार्टअप द्वारा विकसित किया गया है। ड्रोन को Cdspace Robotics Limited नाम स्टार्टअप के संस्थापक निखिल उपाध्याय ने विकसित किया है।

इस ड्रोन के बारे में और जानकारी साझा करते हुए निखिल ने बताया कि ड्रोन 500 ग्राम तक का वजन ले जा सकता है और एक बार चार्ज करने पर यह करीब 50 किलोमीटर तक उड़ान भर सकने में सक्षम है।

वहीँ इस टेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी साझा करते हुए टिहरी जिला अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पांगती ने न्यूज़18 को बताया कि,

“हेल्थकेयर क्षेत्र में ड्रोन जैसी तकनीकों की संभावनाओं को व्यापक रूप से तलाशने के लिए एक प्रोजेक्ट के तौर पर, गुरुवार को एक ब्लड यूनिट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नंदगाँव से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में पहुंचाई गई। नंदगांव 32 किलोमीटर दूर है और सामान्यतः वहां से जिला अस्पताल पहुंचने में लगभग 50-60 मिनट लगते हैं, लेकिन ड्रोन के जरिये बिना किसी नुकसान के ब्लड को महज़ 18 मिनट में जिला अस्पताल पहुँचाने में हमनें सफ़लता प्राप्त की।”

इस बीच डॉ. पांगती के अनुसार इस ड्रोन की विश्वसनीयता की जांच करने के लिए, आने वाले हफ्तों में टिहरी में भी इसी तरह की परीक्षण उड़ानें शुरू की जाएंगी। और पूरी तरह से आश्वस्त होने पर ही इसको व्यावहारिक जीवन में उपयोग के लिहाज़ से हरी झंडी की जाएगी। 

खैर! इस बीच भले ही यह परीक्षण छोटा हो, लेकिन इसने आने वाले समय में हेल्थकेयर क्षेत्र में ड्रोनों के इस्तेमाल के लिए एक बड़ा दरवाजा खोल दिया है।

अमेज़न और इत्यादि के चलते हमनें भले ही ड्रोन को डिलीवरी, मनोरंजन और फ़ोटोग्राफ़ी जैसे क्षेत्रों में उपयोग होते देखा हैं। लेकिन भारत जैसे देश में हेल्थकेयर क्षेत्र में ड्रोन का ऐसा इस्तेमाल काफी दिलचस्प और सराहनीय है।

इस बीच हम उम्मीद करते हैं कि देश में केंद्र और राज्य की सरकारें ऐसी तकनीक और इनके निर्माताओं को प्रोत्साहित करेगी ताकि आने वाले समय में देश की कई बड़ी बुनियादी समस्याओं को तकनीकी रूप से हल किया जा सके और लोग इस क्षेत्र में कार्य करने को इच्छुक हों। 

 

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