कोरोना वायरस (COVID-19) से बचाव की सटीक वैक्सीन बनाने के कितने करीब हैं हम?

  • by Staff@ TSD Network
  • March 28, 2020
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कोरोना वायरस (COVID-19) ने दुनिया भर में कहर बरपाया हुआ है। यहाँ तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) भी COVID-19 को एक महामारी घोषित कर चूका है।

लेकिन दुनिया भर की निगाहें अब सिर्फ और सिर्फ इस चीज़ पर है कि आखिर कब कोई डॉक्टर या वैज्ञानिक इस महामारी के सटीक इलाज के साथ सामने आये और कोई ऐसी वैक्सीन तैयार करे जो वाकई इसके उपचार के लिहाज़ से कारगार हो।

फ़िलहाल तो दुनिया भर में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन जैसे तरीकों से ही कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने की कोशिशें की जा रहीं हैं लेकिन अभी तक दुनिया के किसी भी हिस्से में इसके लिए कोई पुख्ता वैक्सीन या टिका नहीं बन सका है।

कब तक बन सकती है वैक्सीन? और कितना समय लगेगा?

आपको बता दें दुनिया भर की करीब 35 टॉप कंपनियां और वैज्ञानिक संस्थाएं इसके उचार को लेकर तेजी से शोध और कोशिशें कर रही हैं। और इनमें से कई कंपनियों ने जानवरों पर परीक्षण की शुरुआत भी कर दी है।

इस बीछ बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक विल्टशर के एक रिसर्च सेंटर में जानवरों पर वैक्सीन का परीक्षण शुरू होने जा रहा है, वहीँ ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में इंसानों पर शुरुआती सेफ्टी ट्रायल भी अगले महीने शुरू हो सकते हैं।

इस बीच बोस्टन स्थित बायोटेक फर्म Moderna ने अपनी वैक्सीन का मानव परीक्षण कुछ ही दिनों पहले शुरू कर दिया था। और इस तरह अमेरिका में इस महामारी से बचाव के लिए किसी भी वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण शुरू हो गया है।

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आपको बता दें किसी भी वैक्सीन (टीके) का परीक्षण 3 चरणों से गुजरता है। सबसे पहले टीके का परीक्षण चंद लोगों में किया जाता है। दूसरा चरण में देखा जाता है कि वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा, जिसके बाद इसको करीब सौ लोगों को दिया जाता है। वहीँ तीसरे चरण में यह वैक्सीन वायरस प्रभावित जगह में करीब हजार लोगों को दी जाती है।

इन सब के सकारात्मक परिणामों के बाद ही किसी टीके को स्वीकृत मिलती है। इस  प्रक्रिया में अपने आप ही कम से कम 18 महीनें का समय लग जाता है।

हालाँकि इसके बाद भी वैक्सीन तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन करना और इसके उत्पादन के लिए सेटअप तैयार करना भी काफी समय लेता है। क्यूंकि हर नयी वैक्सीन के लिए नया विशेष सेटअप और रसायन चाहिए होता है।

इस बीच भारत समेत कई जगहों पर मलेरिया और HIV जैसी दवाइयों को मिला कर डॉक्टरों ने कुछ मरीजों को ठीक करने का दावा किया है। लेकिन हम साफ़ साफ़ यह बताना चाहेंगें कि अभी तक किसी भी जिम्मेदार एजेंसी द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। तो ऐसे में कोई भी तब तक पुख्ता तौर पर दावा नहीं कर रहा है।

इस बीच आपको बता दें भारत को स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के पैमाने पर विश्व में 144 वें स्थान पर रखा गया है। ऐसे में यह बहुत ही जरूरी है कि हम सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी को समझे और लॉक डाउन का गंभीरता से पालन कर, इस वायरस के प्रसार को रोकने की पूरी कोशिश करें। क्यूंकि कम्युनिटी स्प्रेड (सामुदायिक संक्रमण) के स्तर पर पहुँचने के बाद देश के लिए इस चुनौती से निपटना काफी मुश्किल हो जाएगा।

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