May 31, 2020
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Facebook’s global digital currency ‘Libra’ the social digital

आख़िर क्यों हो रहा है Facebook की ग्लोबल डिजिटल करेंसी ‘Libra’ का विरोध?

  • by Team TSD
  • June 24, 2019

बढ़ती डिजिटल करेंसी की होड़ में अब फेसबुक (Facebook) भी शामिल हो गया है। और इस प्रयास में फेसबुक (Facebook) को कई बड़ी वैश्विक कंपनियों का भी साथ मिल रहा है। 

जी हाँ! हम बात कर रहें हैं, फेसबुक द्वारा नई डिजिटल करेंसी की शुरुआत के ऐलान को लेकर। दरसल 18 जून 2019 को फेसबुक ने घोषणा की कि वह 2020 की पहली छमाही तक ‘Libra’ नामक एक वैश्विक डिजिटल मुद्रा पेश करने जा रहा है। इसका संचालन जिनेवा स्थित लिब्रा एसोसिएशन (Libra Association) द्वारा किया जाएगा।

इस बीच जैसा कि हमनें आपको बताया कि फेसबुक इन प्रयासों में अकेला नहीं है। इस पहल में फेसबुक के साथ इस Libra Association में करीब 28 संस्थापक साझेदार शामिल हैं। इनमें Mastercard, PayPal, PayU, Visa, Booking Holdings, eBay, Facebook/Calibra, Lyft, Spotify, Uber, जैसे कुछ बड़े नाम शुमार हैं।

लेकिन फेसबुक (Facebook) द्वारा इस Libra के लांच संबंधी ऐलान के बाद से ही इसको लेकर आलोचनाओं का दौर भी शुरू हो गया है। दिलचस्प यह है कि इसमें फेसबुक के सह-संस्थापक रहे Chris Hughes भी शामिल हैं, जो पिछले कुछ समय से प्लेटफ़ॉर्म और इसकी नीतियों के कड़े आलोचक बनकर उभरे हैं।

आखिर क्या है लिब्रा एसोसिएशन (Libra Association) का तर्क 

लिब्रा एसोसिएशन (Libra Association) द्वारा जारी किये गये व्हाईट पेपर (White Paper) में कहा गया है कि इस नई डिजिटल करेंसी की पेशकश के जरिये कंपनी का मकसद,

“एक साधारण वैश्विक मुद्रा और वित्तीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है जो अरबों लोगों को सशक्त बनाना है।”

और इसमें सबसे अहम रोल है दुनिया में मौजूद सस्ते डेटा और स्मार्टफोन का। कंपनी द्वारा दिए गये आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.7 बिलियन वयस्क आज भी संगठित वित्तीय प्रणाली से जुड़ नहीं सकें हैं। जबकि उनमें से अधिकतर के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधा मौजूद है।

लेकिन उनका किसी संगठित वित्तीय क्षेत्र से न जुड़ने का कारण मुख्यत उच्च शुल्क, पहुंच के लिहाज़ से जटिल और और अधिक लिख जोख, और दस्तावेज़ों की कमी हैं। और Libra इन्हीं चुनौतियों का समाधान बनकर पेश की जाएगी। जिसके जरिये हम वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन का रास्ता तैयार करने की कोशिश करेंगें।

श्वेत पत्र कहता है:

“विश्व स्तर पर पैसा चलाना उतना ही आसान और कम खर्चीला होना चाहिए – और इससे भी अधिक सुरक्षित और सुरक्षित – एक पाठ संदेश भेजना या एक तस्वीर साझा करना, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ रहते हैं, क्या करते हैं या कितना आप प्राप्त करते हो।”

व्हाईट पेपर (White Paper) में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर पैसों का लेनदेन आसान और कम खर्चीला होना चाहिए। साथ ही यह अत्यधिक सुरक्षित भी हो, जैसे आप Text या फ़ोटो शेयरिंग करते हैं, जिसमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ रहतें हैं, क्या करते हैं? 

आखिर बिटकॉइन (Bitcoin) से कैसे अलग है लिब्रा (Libra)?

इस बात में कोई शक नहीं कि बिटकॉइन (Bitcoin) और लिब्रा (Libra) दोनों ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। मलतब कि यह दोनों ही केंद्रीकृत लेनदेन प्रणाली की बजाए एक डिस्ट्रिब्यूटेड लेज़र के एक रूप कार्य करते हैं।

लेकिन तकनीकी आयामों में कुछ कुछ सामान होने के बावजूद बिटकॉइन (Bitcoin) से कहीं अलग ही नज़र आता है लिब्रा (Libra)। 

दरसल एक ओर जहाँ बिटकॉइन 2008 में पहली बार दुनिया के सामने तो आया लेकिन आज तक सातोशी नाकामोतो के रूप में सके संस्थापक की पहचान एक रहस्य बनी हुई है। और इसको दुनिया भर में विनियमन से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत सहित कई प्रमुख देशों की सरकारें आज भी इसको अपनी संगठित वित्तीय प्रणाली में शामिल नहीं करना चाहती हैं।    

वहीँ Libra 28 प्रभावशाली कॉर्पोरेट संस्थाओं की एक पहल है। जो इसको कहीं अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है, क्यूंकि इन कॉर्पोरेट के पास असीम चल-अचल संपत्ति हैं, जो इनको जवाबदेह बनाती हैं। 

वही इसकी सफ़लता के अवसर इसलिए भी बढ़ जाते हैं क्यूंकि फेसबुक के पास पहले से ही 2 बिलियन से अधिक उपयोगकर्ता आधार है, और इसके जरिये वह इस करेंसी के बहुतायत उपयोग को कहीं-न-कहीं सुनिश्चित कर सकता है

लेकिन क्यूँ हो रहा है Libra का विरोध? 

अगर Bitcoin से परे Libra में कॉर्पोरेट जवाबदेही तय की जा सकती है तो भला इसको लेकर संशय और आलोचन क्यों हो रही है? दरसल, इसके भी जायज कारण हैं। 

जहाँ एक तरफ ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार फ्रांसीसी वित्त मंत्री ने सात केंद्रीय बैंक गवर्नरों के समूह को बैठक के लिए आमंत्रित कर ‘फेसबुक की इस परियोजना’ पर चर्चा के लिए बुलाया है। रिपोर्ट के अनुसार वह Libra को लेकर गोपनीयता, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्त पोषण जैसे मुद्दे को लेकर चिंतित हैं। और जरा आप भी सोचिए कहीं यह जयाज कारण तो नहीं? 

वहीँ इस बीच यूरोपीय संसद ने यह संशय व्यक्त किया है कि फेसबुक इसके जरिये एक “शैडो बैंक” के रूप में उभर सकता है, जिसमें नियामक इत्यादि को लेकर उच्च सतर्कता होनी आवश्यक है।

लेकिन इनमें सबसे दिलचस्प है, फेसबुक के सह-संस्थापक Chris Hughes का तर्क जिन्होंने इस डिजिटल मुद्रा को “भयावह” करार दिया है, और कि यह वैश्विक वित्तीय शक्ति को केंद्रीय बैंकों से हटाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सौंपने की साजिश है।

यह सभी तर्क अपने अपने जगह पर सही भी नज़र आते हैं और कहीं न कहीं अपने विशाल नेटवर्क के बावजूद फेसबुक को Libra को सुचारू रूप से वैश्विक पटल पर पेश करने से पहले इन सभी संदेहों और सवालों के ठोस जवाब के साथ तैयार होना पड़ेगा। 

इस बीच आप भी Facebook की इस नई डिजिटल मुद्रा Libra को लेकर अपना मत देश के साथ नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें!    

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